May 26, 2017

Go all the way, O beloved friend!

Go all the way
O beloved friend
O fellow traveller

There is beauty
Do not stop there
There are variety of delicious foods
Do Not stop there
There are sensual pleasures
Do not stop there
There are aromatic fragrances
Do not stop there

Go all the way
O beloved friend
O fellow traveller

There are exciting, good relationships
Do not stop there
There are attachments and family bondings
Do not stop there
There are material riches - cars, bunglows, gold, silver and diamond
Do not stop there

Go all the way
O beloved friend
O fellow traveller

There are love-hate relationships
Do not stop there
There is pain and hatred
Do not stop there
There is jealousy and anxiety and suffering
Do not stop there
There is old age and death
Do not stop there

Go all the way
O beloved friend
O fellow traveller

There are promises of a better future
Do not stop there
There is fame and recognition
Do not stop there
There is pride, power and tons of money
Do not stop there

Go all the way
O beloved friend
O fellow traveller

There is sheer bliss
Do not stop there
There is tremendous peace
Do not stop there
There is deep love with partner
Do not stop there
There is a joyful existence
Do not stop there

Go all the way
O beloved friend
O fellow traveller

There is nothing that is beyond "That"
There is nothing of this world that is
separate from "That"
All that this world has to offer
is nothing without knowing "That"

Go all the way to "Truth"
O beloved friend
Do not stop anywhere
Go all the way to "That"
O beloved friend

May Grace be with you
May your eyes and heart be clear
to receive Grace
And guide you through

Go all the way
O beloved friend
Go all the way

- Tanu Shree

May 15, 2017

प्यारी माँ



एक माँ ने मुझे जनम दिया,पाला
और तूने ऐसे अपनाया
जैसे तूने ही हो, जनम दिया
प्यारी माँ

सौभाग्य वाले होते हैं वो बच्चे
जिनकी होती हैं
दो माएँ
प्यारी माँ

तेरा प्रेम भरा विशाल दिल
इस दुनिया के सारे बच्चो को
समाने की शक्ति रखता है
प्यारी माँ

तेरी ममता में कोई मोह नही
बस प्रेम है
प्यारी माँ

तूने इतनी सुंदर आत्मा को जन्मा
और उसे ऐसा शुध, शांत, प्रेम पूर्ण, स्वरूप दिया
तेरा जीवन भर धन्यवाद करूँ तो भी कम है
प्यारी माँ

परमात्मा तुझे अपनी भी माँ बना
प्रेम में समा दे
प्यारी माँ

मैं इस जीवन में
स्वयं में सत्य, प्रेम, परमात्मा को जान
तुझे उसका तोहफा दे पाऊं
तो धन्य हो जाऊं
प्यारी माँ

तेरे प्रेम में, तेरी प्यारी मैं
तू मेरी प्यारी माँ

- तनु श्री

प्यारी माँ



बरगद के पेड़ की छाया सा
तेरा आँचल
प्यारी माँ

तेरे होने से मैं सदा बच्ची ही रहूंगी
तेरा होना ही काफ़ी है
प्यारी माँ

कुछ भी कहना तेरे बारे में
कम ही है
प्यारी माँ

तूने ध्यान का, प्रेम का गर्भ मुझे दिया
और मेरा सारा जीवन बदल दिया
प्यारी माँ

जब मैं दुनिया से परेशान हो
रोती थी
तेरी एक जॅफी
सारा दर्द समेट लेती थी
प्यारी मां

जब में खिल-खिला के हँसी
तो तू आनंद से झूम उठी
प्यारी मां

तुझ  पर कितना हक जमाया
ये करो, वो करो, आपको समझ में क्यों नही आता
तूने हँसी से सब समा लिया
प्यारी माँ

तेरी मस्ती से मैने
हर स्थिति में मस्त रहना सीखा है
प्यारी माँ

सालों साल बीत गये
तुझे कभी धन्यवाद दिए हुए
तुझे ये ज़ाहिर किए
की कितनी धन्य हूँ मैं
तुझे अपनी माँ पाकर
प्यारे माँ

तुझे इस जीवन में कुछ दे सकती हूँ
तो बस सत्य, शुन्य और प्रेम का तोहफा
ताकि तू भी उस असीम में मिल
स्वयं में परमात्मा जान ले
प्यारी माँ

प्रार्थना ये मेरी पूरी हो
प्रार्थना करना
तेरी प्रार्थना वो ज़रूर सुनेगा
प्यारी माँ

तेरे प्रेम में, तेरी प्यारी मैं
तू मेरी प्यारी माँ

- तनु श्री


May 12, 2017

बचपन से हूँ देख रही आपको...



दिल मैं है जो धन्यवाद
कैसे कहूँ
क्या लिखूं
कैसे बयान करूँ

बचपन से हूँ देख रही आपको
मस्त मौला सा
संसार में रह रहा
एक सन्यासी सा
हर फ़र्ज़ निभा रहा
हर काम कर रहा
कमल के फूल भाँति
अन्छूआ सा

राज़ इसमे है क्या
बचपन से हूँ सोच रही

आपको जिसने कहा बुरा
मैने उन्हे ना चुना
और धन्य हुई
प्रेम के अपार धन से

सदा आपका होना ही काफ़ी रहा
अंतर की प्यास को जगाए रखने को
मुझे इस रास्ते पर चलाए रखने को

आपके मार्ग-दर्शन ने
आईने पर पड़ी धूल
को हटाया
दो होने के वहम से
है आज़ाद करवाया
बचपन से हूँ सोच रही
ऐसा अजूबा कैसे बनाया

क्यों सब आप से आनद में नही
पर मैं चाहती थी ऐसा होना
बचपन से ही
संसार में रहना
सन्यासी की तरह जीना

पता नही ऐसे कभी
क्या अच्छे कर्म हुए मुझसे
जो इतनी धन्यभागी हुई
इस जीवन में
बचपन से आपको जान
स्वयं को ही जान रही

आपके जानम दिवस पर
प्रार्थना है ये परम से
आपकी रोशनी,
और बहुत दिए जलाए
आपका आलोक
बहुतों की मदद करे
उस एक को जानने में
जो है ही

बचपन से हूँ देख रही
तुझमे परमात्मा को

- तनु श्री


    Dedicated to chachu on his birthday



May 5, 2017

प्यारे भाई मनु

प्यारे भाई
तेरी बहुत याद आई
तू होता तो
आलू के पराठे ख़ाता

तू होता तो
होती थोड़ी नोक झोंक
नाराज़ होता
फिर मान जाता
घुट कर जॅपी पाता
प्यारे भाई
तेरी बहुत याद आई

जीवन का सबसे लंबा समय
हुमने साथ में है बिताया
२३ साल कैसे गुज़रे
समझ में नही आया

मैं कहानियाँ सुनाती थी
तू सुनता था
तेरी सहनशीलता से
सबको मोह लेता था
घर में होती थी
जब तू तू मैं मैं
तब तू ही बढ़प्पन दिखा
करवाता था सबकी सुलह

तेरी धैर्य से सुनने की कला
मुझे भी सिखाना
मैं भी सीख रही
श्रोता होना
बिना विचार के
शून्या हो कर सुनना

प्यारे भाई
तेरी बहुत याद आई

तुझमे जो है खूबियाँ
मुश्किल है आजकल पाना
एक प्रेम भरा बड़ा दिल
सादगी, धैर्य, सहनशीलता

धन्य हो गयी मैं
तुझे अपना भाई पा कर
तुझमे एक प्रग्य इंसान
को जानकार

प्रार्थना है ये परमात्मा से
तू फूल की तरह खिले
तेरी खुश्बू सब ओर महके
तेरा आनंद कन कन से झलके
और जब भी हम मिले
उस एक में ही मिल जाएँ

प्यारे भाई
तेरी बहुत याद आई

- तनु श्री




Gratitude to parents!

Books read this year:

The book of Nanak
Timeless in time: Sri Ramana Maharshi
Zen masters of China: the first step east: Zen stories
The principal Upanishads: the essential philosophical foundation of Hinduism (In progress)
Japji Saab - The True Name: by Osho (In progress)
Ramakrishna Parables:  by Ramakrishna Paramhansa
An ocean of the ultimate meaning: teachings on Mahamudra by Thrangu, Rinpoche
The Jewel Tree of Tibet: by Robert Thurman
Joyful wisdom: Buddhist book by Yongey Mingyur, Rinpoche

No, that was nowhere a resolution of this year. Like everything just happens...reading too.
We are blessed to have Toronto Public Library at a walking distance, and we're taking full advantage of it.


One of the joys of going home in Jalandhar is the small library on the first floor and reading such beautiful collection of books. My father has been an avid reader and has been collecting all material so that someday we might read them. And thankfully, both of us (me and my brother) find joy in reading. Sitting on the chair or lying on the dewan, looking out of the windows, I have enjoyed reading many books from his collection and added few more. Even beloved Chachu has been an avid reader. The way papa and chachu have been talking about books, it appears to the listener as if they are talking about diamonds and precious jewels. 
Now I know that they were. :)

Immensely grateful to my father and mother to give an environment of meditation, books, and creativity. My mother being a great painter (someday I will exhibit her paintings too), gave me a womb of creativity and meditation. She was painting and meditating the entire 9 months. My father being very technical has imparted his intellectual skills :). By the way, for those who do not know, I work as a Big Data Specialist. Also, himself and chachu are amazing photographers. They have always been so compassionate to animals, birds and trees that we learnt to love and respect all beings. Since our childhood, we used to protect, love and feed animals. We never had a materialistically rich childhood but it was indeed artistically, intellectually and spiritually rich.


My parents deserve my gratitude for life, for providing with such an enriching upbringing.

Apart from expressing my deepest gratitude to dear parents, what else can I do to give them something in return? I had been thinking of this for many years and many years back, I realised that the only gift I can give is to realise my true self,
to become so peaceful, so joyful,
to find the truth of my being, of my existence. 
So that while they are in this body,
I can share my peace with them, 
I can be of medium to realise their own Truth
before they leave their current bodies
(and may Grace be with them, that they do not need another one). 
All of them being on their own spiritual journey in the divine plan, I do not know if this is anywhere possible or needed, but it has been a calling of this child of them.


With Love





The longing and love encompasses all

May 3, 2017

आँखें खुली हैं

आँखें खुली हैं
पर जो है, वो नही है दिख रहा
आँखे खुली हैं
पर देखने वाला अपने ही सपनो में, विचारों में, है खोया खोया
"आज तो लेट हुए
आज ऑफीस में बॉस को क्या कहँगे
कल उसने ऐसा क्यों कहाँ था
उसका ज़रूर कुछ मतलब होगा
उसके पास कितना अच्छा मोबाइल है
मुझे भी है लेना एक ऐसा"


अलग अलग रंग रूप हैं
अलग अलग पहनावा
आँखें पर सबकी एक सी
एक सी ही दुख की, तकलीफ़ की भाषा
एक सी ही खुशी की, प्रेम की भाषा

आखें खुली हैं
पर जो है वो नही है दिख रहा

कोई पूछता है परमात्मा है तो साबित करो
कोई ये क्यों नही पूछता
की अपनी आखें कैसे सॉफ करें
की शायद हूमे ही ना हो दिखता वो
ऐसा प्रशण जो है पूछता
परमात्मा की तरफ कदम है बढ़ा लेता
संसार में रहते हुए भी
सन्यासी है कहलाता

जो है यहीं है
अपनी आखों के पीछे पड़ी धूल को हटाना
विचारों की, सपनो की भीड़ से निकल
जहाँ है वहीं अपना ध्यान है ले आना
एक ऐसी स्थिरता को जानना
जहाँ ना हो एक भी विचार
जहाँ ना हो धूल का एक भी कण
ऐसी असीम शांति को उपलब्ध हो चुकी
आँखों को है दिखता
जो है, जैसा है
ऐसी आखों को है दिखता
सत्य प्रेम और परमात्मा

जो है यहीं है
स्वयं भी
प्रेम भी
परमात्मा भी
बस आँखे अंदर से खुलने की बात है


May 2, 2017

Painting Exhibition at Toronto Ontario

Dear Friends,
My paintings were exhibited in an art show in Toronto on Sunday, 30th Apri at
The Classic/Excellence Recreation Centre at 89 Skymark Dr, North York, ON M2H 3S6,
Please find pictures from the exhibition below.















Heartiest gratitude dear friends for the wishes and sharing the joy.
For both of us it was a wonderful experience ....
Many people appreciated the art...and there were so many artists from around the world and looking at their unique work made us more 
inspired. I will be experimenting something new soon.

Some of the people kept looking at the paintings for very very long quietly. Some came back 5 times and someone whole day.


Wonderful sharing...
We got tired today but it was worth it.

Surprisingly it was also a day of praise of India...people praised india to their hearts content and we received many hugs and invitations :)

December 7, 2016

Poems on separation with beloved - "Fills me with it"

May the lightness of the floating cloud
Fills me with it

May the sweetness of my beloved's heart
Fills me with it

May the innocence of my beloved's eyes 
Fills me with it

May the purity of our being
Dissolves me in it

Poems on separation with beloved - "I will wait"

Darling 
Where is the sweet voice of love 
Where are the gestures of care
Where are the warm hugs 
Where is that soft smile
Where are those eyes overflowing with ocean of love 
Your presence is adding beauty to another space
While I will wait ...
Even though we can never separate 
For the senses to meet and cherish the voice, eyes, warmth, beauty, love... 
I will wait ❤

Poems on separation with beloved - "I am here, you are here"

Beloved you have travelled in time and space...
But I am here, you are here.

The feeling of physical absence is also here...
But the feeling of separation is no more...
As I am here, you are here 
💕